आजादी की बंदिशें
आजादी की बंदिशें भारत एक गणराज्य है अर्थात् इसमें गण या जनता सर्वोपरि है। इसी जनता को अंग्रेजों की दासता से मुक्ति पंद्रह अगस्त उन्नीस सौ सैंतालीस को मिली थी लेकिन यह आजादी भी कुछ बंदिशों को रखकर मिली थी। यह पहली बार था जबकि भारतीय जनता किसी विदेशी शोषक की दासता से स्वयं के प्रयासों से मुक्त हो रही थी। इससे पहले आने वाली तमाम विदेशी ताकतों ने अंग्रेजों जैसा शोषण नहीं किया था। फिर भारतीय संविधान के निर्माण और अंगीकार करने की प्रक्रिया में स्वतंत्रता को अनेक पक्षों व दृष्टिकोणों से देखा-परखा गया। हमारा संविधान पुस्तक में सुभाष कश्यप इस धारणा को सुदृढ़ करते हैं और लिखते हैं - ' हमारे संविधान की उद्देशिका में स्वतंत्रता का अर्थ केवल नियंत्रण या आधिपत्य का अभाव ही नहीं है। यह विचार , अभिव्यक्ति , विश्वास , धर्म और उपासना की स्वतंत्रता के अधिकार की सकारात्मक संकल्पना है। ' आजादी बड़ा दिलचस्प शब्द है और अपने अंदर बहुत से अर्थ समेटे हुए है। अंग्रेजों की दासता से मुक्त हुए हमें सात दशक से भी ज्यादा का समय बीत गया है लेकिन अभी भी हम कहाँ कह सकते हैं कि हम पूर्णतः आजाद हैं। हमारे ऊपर...